पित्ताशय में पथरी (Gallstones) — कारण, लक्षण, बचाव, सावधानी, डाइट और इलाज
🔬 पित्ताशय में पथरी क्या होती है?
पित्ताशय (Gallbladder) एक छोटा थैलीनुमा अंग होता है जो लीवर के नीचे स्थित होता है। इसका काम पित्त रस (bile) को संग्रहित करना होता है, जो कि भोजन के पाचन में मदद करता है, विशेष रूप से वसा के पाचन में।
पथरी (Gallstones) छोटे-छोटे कठोर कण होते हैं जो पित्त रस में मौजूद कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन और लवणों के असंतुलन के कारण बनते हैं।
🧬 पित्ताशय में पथरी बनने के कारण:
- कोलेस्ट्रॉल का अधिक स्तर
- बिलीरुबिन की अधिकता (लिवर रोग या खून की बीमारी के कारण)
- पित्त रस का अपर्याप्त स्राव
- मोटापा
- तेल-घी युक्त और तली हुई चीजों का अधिक सेवन
- लंबे समय तक उपवास करना या अचानक वजन कम करना
- महिलाओं में हार्मोनल बदलाव (गर्भनिरोधक गोली, गर्भावस्था)
- जेनेटिक फैक्टर (वंशानुगत कारण)
⚠️ लक्षण (Symptoms):
कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं होते (Silent Gallstones), लेकिन जब पथरी पित्त नली में फंसती है, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- दाहिनी ऊपरी पेट या बीच में तेज दर्द
- दर्द खाने के बाद (विशेषकर वसायुक्त भोजन के बाद)
- मतली और उल्टी
- पेट में फुलाव और गैस
- बुखार (अगर इंफेक्शन हो जाए)
- पीलिया (अगर पथरी बाइल डक्ट को ब्लॉक कर दे)
🛡️ बचाव और सावधानियाँ (Prevention & Precautions):
- नियमित व्यायाम करें
- फाइबर युक्त संतुलित आहार लें
- तेल-घी और तले हुए भोजन से परहेज करें
- वजन धीरे-धीरे कम करें (Crash Diet से बचें)
- लंबे समय तक उपवास न करें
- भरपूर मात्रा में पानी पिएं
🥗 डाइट में क्या खाएं और क्या न खाएं?
✅ खाएं:
- हरी सब्जियाँ (पालक, मेथी, लौकी आदि)
- फलों का सेवन (पपीता, सेब, अमरूद)
- दलिया, ब्राउन राइस, ओट्स
- लो-फैट दूध या दही
- उबली दालें
- नींबू पानी, नारियल पानी
❌ बचें:
- तले हुए और वसायुक्त भोजन
- रेड मीट और ज्यादा फैटी फूड
- बेकरी प्रोडक्ट्स (पेस्ट्री, केक, कुकीज)
- फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक
- अधिक मसालेदार और तीखा खाना
💊 इलाज (Treatment):
- दवाइयों से इलाज:
- पथरी छोटी हो तो ursodeoxycholic acid जैसी दवाएं दी जाती हैं, जो कोलेस्ट्रॉल की पथरी को धीरे-धीरे घोल सकती हैं।
- यह इलाज लंबा चलता है और सभी पर असर नहीं करता।
- ऑपरेशन (Surgery):
- Cholecystectomy (पित्ताशय को निकालना) सबसे आम इलाज है, खासकर अगर दर्द बार-बार हो रहा हो या पथरी से जटिलताएं हो रही हों।
- दो प्रकार होते हैं:
- लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (छोटे चीरे द्वारा, जल्दी रिकवरी)
- ओपन सर्जरी (क्लासिकल, बड़े केस में)
- ERCP (अगर पथरी bile duct में हो):
- एंडोस्कोपी द्वारा पथरी निकालना।
📝 सर्जरी के बाद सावधानियाँ:
- 15-20 दिन तक भारी वजन न उठाएं
- हल्का भोजन लें
- आराम करें और डॉक्टर की सलाह लें
- टहलने की आदत बनाएँ
